कैसे देखते ही देखते ‘कोरोना’ मरीजों का ‘एपिसेंटर’ बन गया भीलवाड़ा, पढ़ें ये खास रिपोर्ट..

कैसे देखते ही देखते ‘कोरोना’ मरीजों का ‘एपिसेंटर’ बन गया भीलवाड़ा, पढ़ें ये खास रिपोर्ट..

राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में कोरोना संदिग्धों की संख्या में हुए अचानक इजाफे को देखकर पूरा प्रदेश सकते में आ गया है। आखिर यहां कोरोना पॉजिटिव की संख्या में अचानक इजाफा कैसे हुआ? किस तरह से भीलवाड़ा जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग इस महामारी के प्रकोप को भांपने में असफल रहा। शहर में पहले मरीज से लेकर यह संख्या 13 कोरोना पॉजिटिव तक कैसे पहुंची? और देखते ही देखते कैसे भीलवाला शहर कोरोना मरीज एवं संदिग्धों का एपिसेंटर यानि केंद्र बिंदु बन गया? इन सारी बातों को आप ऐसे समझिए।

आपको बता दें कि भीलवाड़ा टेक्सटाइल इंड़स्ट्री का एक बड़ा केंद्र है और यहां देसी विदेशी लोगों का आना जाना लगा रहता है। ऐसे में एक व्यापारी 10 मार्च को स्पेन से दिल्ली और दिल्ली से उदयपुर और वहां से वाय रोड़ होते हुए 11 मार्च को भीलवाड़ा पहुंचा। सूचना मिलने पर चिकित्सा विभाग की टीम जांच के लिए उसके घर पहुंची। जांच में सामान्य पाए जाने पर उसे 14 दिन तक घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी गई। लेकिन 4 दिन बाद ही सोमवार को उसे बुखार की शिकायत मिली। व्यापारी डायबिटीज और हेपेटाइटिस से भी पीड़ित था, ऐसे में मंगलवार को ही चिकित्सा विभाग की टीम ने घर जाकर उद्यमी और उसकी बेटी की जांच की जिसमें बेटी की तबीयत सामान्य पाई गई, लेकिन उद्यमी पिता को हॉस्पिटल में भर्ती कर जांच के लिए सेंपल जयपुर भेज दिया गया।

इसके बाद से अस्पताल प्रशासन अलर्ट मोड़ पर आ गया और डॉक्टर्स एवं स्टाफ ने मास्क आदि पहनना शुरू किया। इससे पहले तक यहां के सरकारी और निजी अस्पतालों सब सामान्य चल रहा था। न तो मास्क को कोई तबज्जो दी जारी रही थी और न ही सेनेटाइजर की अहमियत को कोई समझ रहा था। जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड के मूत्रायलय के वॉश बेसिन में हाथ धोने के लिए साबुन और सेनेटाइजर की व्यवस्था थी लेकिन अन्य किसी भी वार्ड में यह सुविधा उपलब्ध नहीं की गई थी। वहीं यह बात खुद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल डॉ. राजन नंदा ने कही थी कि मरीजों से ज्यादा उनसे मिलने वाले परिजनों की भीड़ अस्पताल में रहती है।

हालांकि विदेश से आने वाले लोगों पर प्रशासन नजर बनाए हुए था, लेकिन घर पर आइसोलेट के समय वह कितने पाबंद रहेंगे शायद इस बात का अंदाजा प्रशासन को नहीं था। वहीं जब तक पॉजिटिव केस की बात सामने नहीं आई तब तक हॉस्पीटल्स ने भी इसके प्रति बरती जाने वाली सावधानियों को उतनी गंभीरता से नहीं लिया था जितना लेना चाहिए था। वहीं शीतला अष्टमी पर्व और होली के बीच लोगों के मन से कोरोना का भय पूरी तरह से दूर दिखाई दिया। इस मौके पर कई आयोजन हुए जो परंपरागत तौर पर कई वर्षों से चलते आ रहे हैं। इन पर न तो प्रशासन ने कोई सख्ती दिखाई और न ही लोगों ने कोई सावधानी बरती।

15 मार्च को चिकित्सा विभाग को समझ आया कि इसे समय रहते नहीं रोका गया तो परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग ने लोगों को इस खतरे के प्रति आगाह कर दिया। दो दिन बाद ही 17 मार्च को जिला कलेक्टर राजेंद्र भट्ट ने हर घर का तत्काल प्रभाव से सर्वे करने के निर्देश चिकित्सा विभाग को दिए थे। जिसका प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मुख्यालय ब्रह्मालाल चौधरी को नियुक्त किया गया। जिले में 23 मार्च से सिमोली में प्रारंभ होने वाले मेले से पहले यह सर्वे पूरा करने को कहा गया था।

लेकिन 17 मार्च तक सिर्फ 54 लोगों की ही स्क्रीनिंग हो पाई। जबकि जिले के महात्मा गांधी अस्पताल की ओपीडी और आइपीडी में रोजाना करीब 2500 से ज्यादा लोग आते रहे। 18 मार्च से शहर में जागरूकता अभियान को और तेज किया गया। क्योंकि प्रशासन को पता था कि नवरात्र और चेटीचंड जयंती पर विदेश से भारी मात्रा में लोगों के आने की संभावना है। ऐसे में एक अलग से जगह देखने की बात कही गई जहां एकसाथ सभी को रखकर उनकी जांच की जा सके।

जब जिम्मेदारों ने ही बरती लापरवाही :

ऐसे में स्थानीय विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी ने सभी नियमों को ताक पर रख 18 मार्च को अपने आवास पर दिव्यांगों के लिए शिविर लगा डाला। जिसमें दिव्यांगों को स्कूटी देने के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें उनके साथ परिजन भी मौजूद थे, हैरानी की बात है कि इसमें न तो सोशल डिस्टेंसिंग का खयाल रखा गया और न ही किसी के मुंह पर मास्क दिखा। 20 मार्च को दो डॉक्टरों सहित कुल 25 संदिग्ध पाए गए जिससे शहर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में खलबली मच गई। यह मामला यहां के एक निजी अस्पताल ब्रजेश बांगड़ मेमोरियल की लापरवाही के बाद सामने आया। एक जानकारी के अनुसार इस निजी अस्पताल की ओर से करीब 500 मरीजों की एक लिस्ट चिकित्सा विभाग को सौंपी गई। जिनकी स्क्रीनिंग होनी थी। यह काम उदयपुर मेडिकल कॉलेज की टीम ने किया और पहले दिन उन्होंने करीब 200 मरोजों की स्क्रीनिंग कर ली थी।

इधर 20 मार्च को ही इटली से आए दो संदिग्धों को भी एमजीएम हॉस्पीटल में भर्ती किया गया था। जब शहर में 4 लोगों के पॉजिटिव होने की खबर मिली तो प्रशासन ने नियमों को और कड़ा करते हुए जिले की सीमाओं को पूरी तरह से सील कर दिया। वहीं बृजेश बांगड़ अस्पताल को भी सील कर दिया गया। यहां के समस्त स्टाफ के साथ ही डॉ. आलोक मित्तल से पिछले 15 दिनों में संपर्क में आए सभी 5088 लोगों की भी स्क्रीनिंग के आदेश जारी किए गए। अब खुद चिकित्सा मंत्री भी मान चुके थे कि भीलवाड़ा में हालात विकट बने हुए हैं। शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया।

और देखते ही देखते ये हॉस्पीटल बन गया एपिसेंटर :

जानकारी के अनुसार एक बापू नगर का एक संदिग्ध मरीज बृजेश बांगड़ अस्पताल में भर्ती हुआ था। जिसका इलाज यहां के वरिष्ठ डॉक्टर निमोनिया समझकर करते रहे। जब मरीज को फायदा नहीं मिला तो वह भीलवाड़ा से जयपुर आ गया और यहां के निजी अस्पताल में भर्ती हो गया। जब यहां भी सुधार नहीं हुआ तो वापस भीलवाड़ा स्थित अपने घर चला गया और बाद में उसकी घर पर ही मौत हो गई। उसके बाद से ही बृजेश बांगड के डॉक्टर और अस्पतालकर्मियों में हडकंप मच गया। और तब जाकर एक एक करके यहां के सभी संदिग्ध एमजीएम हॉस्पीटल में भर्ती होते गए। कई दिनों के बाद इसकी जानकारी प्रशासन को लगी। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पॉजिटिव मरीजों की संख्या 4 से बढ़कर 6 पर पहुंच गई। वहीं संदिग्ध मरीजों की संख्या एकदम से 25 हो गई।

जब तीसरे स्टेज पर पहुंचा कोरोना :

21 मार्च को शहर के स्थानीय लोगों में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की पुष्टि के बाद भीलवाड़ा जिले में कोरोना तीसरे स्टेज पर पहुंच चुका था। अब तक यहां पॉजिटिव पाए गए लोगों में 3 डॉक्टर और 3 कंपाउंडर की बात सामने आ पाई थी। इनमें 3 डॉक्टर जिस बांगड अस्पताल के थे उसके 265 स्टाफ और उनके परिजनों की स्क्रीनिंग के आदेश दिए गए।

हैरानी की बात ये थी कि इसके बाद भी शहर में कई जगह से खबरें आती रहीं कि लोग घरों से बेपरवाह बाहर निकल रहे हैं। जिन्हें पुलिस समझाइश कर वापस घरों को भेजती रही।

पिछले 3 दिन के हालात पर एक नजर :

21 मार्च को एमजीएच के आइसोलेशन में कुल 29 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 1 मरीज को सही करके घर भेज दिया गया, लेकिन उसे अभी अगले 15 दिन तक घर पर ही आइसोलेट रहने की सलाह दी गई। शेष बचे 28 में से 14 की रिपोर्ट आ गई थी, जिसमें से 4 पॉजिटिव एमजीएच में भर्ती थे और एक डॉक्टर नियाज एवं नर्सिंग कर्मी नईम जयपुर के एसएमएस में भर्ती हैं। इसके अलावा 14 लोगों की रिपोर्ट आनी बाकी है। जब शेष 14 लोगों की रिपोर्ट आई तो उसमें 5 और पॉजिटिव मिल गए। ये सभी बांगड अस्पताल के नर्सिंगकर्मी थे।

22 मार्च तक संदिग्धों की यह संख्या 32 हो गई और वहीं कुल 13 लोग पॉजिटिव पाए गए। रविवार देर रात तक 2 लाख 81 हजार लोगों की स्क्रीनिंग कर ली गई। इनमें से 2 हजार 242 लोगों को आईएलआई रोगी चिन्हित कर 14 दिन के होम आइसोलेशन में रहने की हिदायत दी है।

23 मार्च सोमवार तक होम आइसोलेशन में रखने वाले लोगों की संख्या 2 हजार 414 तक पहुंच गई।

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