ऐसा क्या हुआ कि बच्चे कंपनियों को ही प्लास्टिक के खाली रैपर भेजने लगे!

ऐसा क्या हुआ कि बच्चे कंपनियों को ही प्लास्टिक के खाली रैपर भेजने लगे!

कहते हैं बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं। जिस तरह की सीख उन्हें बचपन में मिलती है, वो उसी तरह समाज में बदलाव लाते हैं। चाहे फिर वो सकारात्मक हो या नकारात्मक, सब बचपन में हुए मस्तिष्क के विकास के तरीके पर निर्भर करता है। इसलिए बचपन से ही बच्चों के मस्तिष्क का विकास अच्छी सीख और बातों से होना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ राज्य के अम्बिकापुर शहर में स्तिथ हौली क्रॉस स्कूल के बच्चों में आपको ऐसी ही सीख दिख सकती है। जिन्होंने वातावरण को बचाने के लिए अनौखी मुहिम चलाई है। जिसमें बच्चे चिप्स, बिस्किट और अन्य खाद्य पदार्थों के खाली रैपर जमा करके कूरियर से कंपनियों को वापस लौटा रहे हैं। साथ ही इन खाली रैपर पर नोट लगाया है। जिसमें लिखा है कि हमें आपका खाना पसंद आया पर हमें कोई आईडिया नहीं है कि इस रैपर के साथ क्या करना चाहिए, इसलिए हम इसे आपके पास वापस भेज रहे हैं। साथ ही इस नोट में आगे कंपनियों को बायोडिग्रेडेबल मटेरियल इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।

दरअसल इस स्कूल के विद्यार्थी पिछले दो वर्षों से कंपनियों को इसी प्रकार के नोट्स के साथ खाली रैपर भेज रहे हैं। नोट्स में नंबर लिखने के कारण कई कंपनियों ने इन्हें कांटेक्ट कर ऐसा करने से मना भी किया है। मगर विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक कंपनियां पर्यावरण के अनुकूल तरीके से रैपर्स बनाना शुरू नहीं करेगी, तब तक वो ऐसे ही उन्हें कचरा भेजते रहेंगे। स्कूल के टीचर्स भी बच्चों के उठाए इस कदम की सराहना कर रहे हैं।

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