असलियत: शाहीनबाग की दादी के बाद अब हाथरस वाली भाभी की फोटो का क्या है सच? ये रही ​हकीकत

असलियत: शाहीनबाग की दादी के बाद अब हाथरस वाली भाभी की फोटो का क्या है सच? ये रही ​हकीकत

Fact Check: किसान आंदोलन के शुरू होते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें वायरल की जा रही हैं। दावा किया जा रहा है कि हाथरस कांड से चर्चित हुई जबलपुर की डॉ. राजकुमारी बंसल अब किसान आंदोलन में भी भाग लेने पहुंच गई हैं। बता दें ​कि डॉ. राजकुमारी बंसल जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर हैं, सितंबर 2020 में हाथरस रेप कांड के दौरान वह पीड़िता के परिजनों से मिलने पहुंची थीं। उस दौरान मीडिया में उनका नाम पीडिता की भाभी के तौर पर उछला था, जिसे राजकुमारी ने खारिज कर दिया था। मगर अब फिर से कुछ लोग उनका नाम किसान आंदोलन के साथ जोड़ रहे हैं, लेकिन जब हमने इस बात की असलियत जाननी चाही तो हकीकत कुछ और ही निकली।

ये बताकर किया जा रहा वायरल :

सोशल मीडिया पर किसानों के साथ खड़ी एक महिला का फोटो ये कहकर वायरल Viral किया जा रहा है कि ‘हाथरस वाली नक्सली भाभी भी किसान बनकर आई है.. अभी भी नहीं समझे क्या।’ मगर जब पहली मर्तबा दोनों की फोटो को मिलाकर देखा गया तो अंतर साफ नजर आ गया, लेकिन मन को तसल्ली नहीं हुई। क्योंकि कई बड़े नेता और अपने आपको बुद्धिजीवी मानने वाले लोगों ने भी इसे शेयर किया हुआ था। इसलिए हमने फोटो की तह तक जाने का फैसला किया।

ये तो 10 माह पुरानी निकली :

जब फोटो के बारे में पड़ताल शुरू की तो पता चला कि ये फोटो वर्तमान में चल रहे किसान आंदोलन की है ही नहीं। ये फोटो 10 फरवरी की है और इसे पंजाब के एक किसान आंदोलन के दौरान भारती किसान आंदोलन यूनियन एकता उगराहां के फेसबुक पेज पर पोस्ट किया गया था। यानी ये फोटो करीब 10 महीने पुरानी है। ऐसे में फोटो में दिख रही महिला का डॉ. राजकुमारी बंसल होना नामुमकिन लग रहा है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो खुद राजकुमारी बंसल ने इस पोस्ट को झूठा बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया है।

आखिरी उम्मीद की अपील :

सोशल मीडिया पर इससे पहले शाहीनबाग वाली दादी का फोटो भी वायरल किया गया था। मगर ये दावा भी झूठा ही निकला था। उसके बाद अब हाथरस वाली भाभी का ये फोटो भी हमारी पड़ताल में झूठा निकला है। अत: आखिरी उम्मीद की अपील है कि सोशल मीडिया पर दिखाई गई बातों को सोच समझकर ही आगे शेयर करें।

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