पुराने जमाने में इस कैमरे से होती थी जासूसी, फिल्मों में काम आते थे ये कैमरे

पुराने जमाने में इस कैमरे से होती थी जासूसी, फिल्मों में काम आते थे ये कैमरे

World Photography Day : राजस्थान की राजधानी जयपुर के मानसरोवर में स्थित निर्मल पारीक के ‘हाउस म्यूजियम’ में करीब 45 से 50 कैमरों का संग्रह मौजूद है जो 1940 से 2020 तक ही कहानी कहते हैं। इस संग्रह में 60 के दशक का वह कैमरा भी मौजूद है जिसका प्रयोग उस समय में जासूसी के लिए किया करते थे। इसके अलावा यहां Nikon से लेकर Canon, Agfa, Pentex, Rolleicord, Pathe और Brownie कंपनी के कई मॉडल्स देखने को मिल जाएंगे। इनमें से कई कैमरों की कहानी और खासियत बड़ी रोचक है जिसे पढ़कर आप भी आश्चर्य करेंगे।

ये कैमरा जासूसी में आता था काम :

Minolta spy camera : सन 1960 के दशक का मिनोल्टा स्पाई कैमरा जिसमें 16 एमएम की रील लगती थी। इसे जापान की कंपनी ने तैयार किया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये थी कि इसे आसानी से छुपाया जा सकता था। इस कंपनी कई छोटे-छोटे आकार के कैमरे बनाए। बताया जाता है कि इन कैमरों का प्रयोग ज्यादातर जासूसी के काम में ही किया जाता था।

Kodak six-20 brownie c : यह एक शुरुआती बॉक्स कैमरा है। इसमें हॉरिजेंटल और वर्टिकल दोनों तरह से फोटो खींचने के लिए अलग-अलग लैंस दिए गए थे। इसमें एक रील में 8 फोटो खिंचती थीं।

Graflex large format camera : इसका प्रयोग द्वितीय विश्वयुद्ध के समय में हुआ था। इसे आपने गांधी फिल्म में जरूर देखा होगा। नामचीन प्रेस मीडिया के लोग इसका प्रयोग करते थे। इसमें हर बार फोटो खींचने पर फोटो बल्व को चेंज करना पड़ता था। इसके लिए फोटोग्राफर को थैला भरकर बल्व साथ में लेकर चलने पड़ते थे।

Auricon video camera : ये हॉलीवुड का 16 एमएम मूवी कैमरा है जो एक साथ ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड करता था। इसमें नॉर्मल-वाइड-टैली 3 लैंस होते थे। इसमें 100 फीट की रील का प्रयोग होता था। इसे यूएसए की कंपनी auricon ने तैयार किया था जो कि हॉलीवुड में स्थित है।

Pathe video camera : ये भी 16 एमएम मूवी कैमरा है, लेकिन इसमें वीडियो के साथ ऑडियो रिकॉर्ड नहीं होती। इस मूवी कैमरे का निर्माण फ्रांस में हुआ था। ये चाबी भरने से चलता था। इसमें भी नॉर्मल, वाइड और टैली 3 लैंस होते हैं।

DLR/SLR कैमरे :

​​पुराने जमाने में डीएलआर कैमरा आते थे जिनमें डबल लैंस का प्रयोग होता था। इस तरह के कैमरे याशिका और रोलीकॉर्ड कंपनियों ने खूब बनाए। ये जापान और जर्मनी की कंपनियां हैं। इसके बाद एसएलआर का चलन आया। जिनमें सिंगल लैंस का प्रयोग हुआ। इसके अलावा मूवी कैमरों की बात करें तो इनमें 3 तरह के लैंसों का प्रयोग किया गया। जिन्हें घुमाकर इच्छानुसार काम में लेते थे। बाद में जूम लैंस ने आकर इसको उन्नत ​कर दिया और जूम लैंस आने के बाद ये तीनों एक ही में समा गए, लेकिन अब फिर से बड़ी-बड़ी मोबाइल कंपनियां अपने मोबाइल्स Mobiles में 3-4 लैंस लगाने लगे हैं। फोटोग्राफी में नए आविष्कारों का ये दौर समय के साथ चलता रहेगा।

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