परिवारवाद की नई परंपरा क्या शिवसेना के लिए होगी फायदेमंद

परिवारवाद की नई परंपरा क्या शिवसेना के लिए होगी फायदेमंद

‘एक कहावत है अंधा बांटे रेबड़ी फिर-फिर अपनों को दे’ महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र के ग्रेट पॉलिटिकल ड्रामे के बाद उद्धव ठाकरे ने आखिरकार गैर बीजेपी सरकार बना तो ली। लेकिन इस कांटोंभरे ताज के साथ सरकार को चलाना आसान नहीं दिख रहा है। इसकी एक झलक हाल ही में हुए मंत्रिमंडलीय विस्तार से साफ देखी जा सकती है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने करीब एक महीने पुराने अपने मंत्रिमंडल में विस्तार करते हुए उन्होंने 36 मंत्रियों को शपथ दिलाई है। इसमें उनके बेटे आदित्य ठाकरे भी शामिल हैं, लेकिन इस मंत्रिमंडल में एक खास बात जो देखने को मिली वो है परिवारवाद। अभी तक उनकी कैबिनेट में राज्‍य के वरिष्‍ठ नेताओं के 13 बेटे और 3 भतीजे शामिल हैं।

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने इन 36 मंत्रियों को शपथ दिलाई। इनमें एनसीपी के 10 कैबिनेट और चार राज्य मंत्री, शिवसेना के आठ कैबिनेट, चार राज्य मंत्री और कांग्रेस के आठ कैबिनेट और दो राज्य मंत्री शामिल हैं। इनमें राजनीतिक परिवारों से जुड़े मंत्री..

— महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम अजित पवार एनसीपी के प्रमुख शरद पवार के भतीजे हैं।

— आदित्य ठाकरे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पुत्र हैं।

— अदिति तटकरे रायगढ़ से एनसीपी सांसद सुनील तटकरे की बेटी हैं।

— बालासाहेब थोराट पूर्व कांग्रेस विधायक भाउसाहेब थोराट के बेटे हैं।

— अशोक चव्हाण पूर्व मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण के बेटे हैं।

— अमित देशमुख पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे हैं।

— विश्वजीत कदम पार्टी के दिवंगत नेता पतंगराव कदम के बेटे हैं।

— शंकरराव गदख पूर्व एनसीपी नेता यशवंतराव गदख के बेटे हैं।

— पूर्व एमपी एकनाथ गायकवाड़ की बेटी वर्षा गायकवाड़।

— शंभूराजे देसा कांग्रेस नेता बाला साहेब देसाई के परपोते हैं।

— धनंजय मुंडे बीजेपी के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं।

— मंत्री बने सतेज पाटिल कांग्रेस नेता डीवाई पाटिल के बेटे हैं।

— पूर्व कांग्रेस मंत्री स्वर्गीय राजाराम पाटिल के बेटे जयंत पाटिल।

— राजेंद्र शिंगणे के पिता भास्करराव विधायक थे।

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