राजस्थान में पीएम केयर फंड के वेंटिलेटर खराब बताकर निजी अस्पताल को 2-2 हजार में दे दिए, पढ़ें

राजस्थान में पीएम केयर फंड के वेंटिलेटर खराब बताकर निजी अस्पताल को 2-2 हजार में दे दिए, पढ़ें

— राजस्थान में वेंटिलेटर्स की ऐसी दलाली, जानकर रह जाएंगे दंग!

सरकारी अस्पतालों में मरीजों की क्षमता पूरी होने के बाद लोग अपनी जमा पूंजी के साथ-साथ कर्जा लेकर निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में राजस्थान सरकार प्रधानमंत्री राहत कोष PM Care Fund से मिले वेंटिलेटर्स Ventilators का सदुपयोग करने की बजाय उनका सौदा करने में लगी हुई है! बता दें कि भरतपुर जिले में ए​क निजी अस्पताल Jindal Hospital को ये वेंटिलेटर्स महज 2-2 हजार रुपए में दे दिए गए। जिनसे अस्पताल प्रशासन अब एक-एक कोरोना मरीज से करीब 30-30 हजार रुपए तक कमा रहा है।

आखिर एक प्राइवेट अस्पताल पर इतनी मेहरबानी क्यों?

मामला भरतपुर स्थित जिंदल हॉस्पिटल का है। जहां पीएम रिलीफ फंड से मिले 10 वेंटिलेटर 2-2 हजार रुपए में प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर देने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जब इस बात की भनक मीडिया को लगी तो एक के बाद मामले की परतें खुलती चली गईं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अस्पताल ने एक आईएएस अफसर के परिजनों का मुफ्त इलाज किया, जिसके बदले उसे ये इनाम स्वरूप दिए गए। अब इसमें आईएएस अफसरों के अलावा मंत्रियों तक के नाम जुड़े होने की खबरें भी सामने आ रही हैं। विपक्ष के अलावा कई स्थानीय लोगों ने अब इस मामले की निस्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

सांसद बोली प्रशासन ने छुपाई जानकारी

बीजेपी सांसद रंजीता कोली ने बताया कि वह प्रशासन से पिछले 2 महीनों से इस बात की जानकारी मांग रही थीं कि पीएम रिलीफ फंड से कितने वेंटिलेटर मिले और उनका कहां कितना उपयोग हो रहा है? लेकिन प्रशासन ने उन्हें कोई सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई। बाद में कलक्टर महोदय से बात करने पर पता चला कि वो वेंटिलेटर खराब थे।

क्या बोले जिम्मेदार?

इस बारे में समाचार पत्रों में वेंटीलेटर्स की तस्वीरें छपीं तो जिम्मेदारों का कहना था कि ये तो खराब थे, इसलिए दे दिए। जब उनसे इस मामले में ज्यादा बातचीत करनी चाही तो कुछ भी कहने से बचते नजर आए। बाद में पता चला कि ये तो अफसरशाही की भेंट चढ़ गए। वहीं जब मामले ने तूल पकड़ा तो जिला कलक्टर हिमांशु गुप्ता ने बताया कि आरबीएम सरकारी अस्पताल को पीएम रिलीफ फंड से 40 वेंटिलेटर मिले थे, जिनमें से 20 ही उपयोग में आ रहे थे। ऐसे में तय किया कि यदि कोई निजी अस्पताल वेंटिलेटर ऑन कॉस्ट इस्तेमाल करना चाहे तो वह ले सकता है। इसी के तहत 10 वेंटिलेटर जिंदल अस्पताल को 2 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर दिए गए।

ventilator misuse case : akhiriummeed.com

अब दौसा में भी सामने आया मामला

वेंटिलेटर्स की शिफ्टिंग का मामला एक मामला अब दौसा जिले से भी सामने आया है, जहां pm care fund से मिले वेंटिलेटर्स को जयपुर भिजवाने की खबर मिली है। मिली जानकारी के अनुसार यहां भी तर्क यही दिया गया कि वेंटिलेटर खराब थे, इसलिए भिजवाया गया।

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