तीरथ सिंह रावत ही मुख्यमंत्री पद की पसंद क्यों? आखिर क्यों पीछे रह गए ये नाम?

तीरथ सिंह रावत ही मुख्यमंत्री पद की पसंद क्यों? आखिर क्यों पीछे रह गए ये नाम?

Uttarakhand. उत्तराखंड के नए सीएम के रूप में बीजेपी ने तीरथ सिंह रावत को चुन लिया है। बुधवार को देहरादून में हुई विधायक दल की बैठक में तीरथ सिंह रावत के नाम पर मुहर लग गई। बता दें कि तीरथ सिंह वर्तमान में गढ़वाल विधानसभा से बीजेपी सांसद हैं। 1964 में जन्में तीरथ सिंह ने छात्र राजनीति से अपने पॉलिटिकल कॅरियर की शुरुआत की। वह शुरू से ही संघ के कार्यकर्ता रहे हैं। बाद में संघ प्रचारक के रूप में भी काम किया है।

तीरथ सिंह रावत ही मुख्यमंत्री पद की पसंद क्यों?

मुख्यमंत्री पद को लेकर तमाम नाम बताए जा रहे थे, लेकिन इनमें तीरथ सिंह रावत का नाम कहीं नहीं था। उनके नाम पर मुहर लगने के बाद सभी के मन में ये प्रश्न उठ रहा है कि आखिर मुख्यमंत्री पद के लिए तीरथ सिंह रावत को ही क्यों चुना? तो चलिए इसके पीछे की कहानी आपको बताते हैं। दरअसल तीरथ सिंह रावत संघ पृष्ठभूमि से आते हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण के हिसाब से देखा जाए तो यहां राजपूत समाज का एक बड़ा वोट बैंक है। इधर प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ब्राह्मण बिरादरी से आते हैं तो जाहिर सी बात है कि सीएम फेस रावत बिरादरी से ही चुनना था। यही कारण है कि बाकी सभी नाम एक-एक कर पीछे छूट गए।

Tirath singh Rawat

पत्नी रह चुकी हैं मि​स मेरठ

उत्तराखंड में सीएम का पद संभालने जा रहे तीरथ सिंह रावत की पत्नी रश्मि त्यागी ‘मिस मेरठ’ रह चुकी हैं। रश्मि पेशे से प्रोफेसर हैं और उन्होंने एजुकेशन में पीएचडी की हुई है। वर्तमान में डॉक्टर रश्मि त्यागी देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में मनोविज्ञान की प्रोफेसर हैं।

पीछे रह गए ये नाम

मुख्यमंत्री पद की रेस में कल दोपहर तक कई नाम सामने आ रहे थे। इनमें अनिल बलूनी, धन सिंह रावत, सतपाल महाराज, अजय भट्ट और केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का नाम शामिल हैं। अगले साल उत्तराखंड में चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी किसी तरह का कोई ​जोखिम उठाने के मूड़ में नहीं है। यही कारण है कि इन सभी नामों को पार्टी ने दरकिनार कर दिया।

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