‘नागरिकता संशोधन कानून’ ऐसे समझें पूरा माजरा..!

‘नागरिकता संशोधन कानून’ ऐसे समझें पूरा माजरा..!

अभी तक देश अनुच्छेद 370 के मुद्दे की चर्चा से उभरा ही था कि बीजेपी सरकार ने दूसरा मुद्दा भी दे दिया जिस पर लोग सुबह-शाम चाय की चर्चा में व्यस्त हैं। वहीं कुछ लोग विरोध के नाम पर माहौल खराब करने का भी काम कर रहे हैं। बात अपने प्रदेश की करें तो यहां सर्दी के बीच लोगों में इस मुद्दे की गर्माहट देखी जा सकती है। जब इस नागरिकता संशोधन कानून के बारे में आमजन से पूछा गया तो जबाव अधूरे से लगे। ए​क जबाव था जो अधिकांश लोगों की जुबां पर था कि ‘जो भी भयो पर मजा आ गयौ भईया…।’

क्या है नागरिकता संशोधन कानून?

नागरिकता संशोधन बिल 12 दिसंबर 2019 को भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद कानून बन चुका है। इससे पहले संसद के दोनों सदनों की ओर से इसे पास किया जा चुका था। इस एक्ट में मुस्लिम धर्म के लोगों को शामिल नहीं किया गया है। नागरिकता संशोधन बिल के कानून बनने के बाद अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और आस-पास के देशों के हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के वो लोग जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया था।

वे सभी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे। CAA में यह भी व्यवस्था की गई है कि उनके विस्थापन या देश में अवैध निवास को लेकर उन पर पहले से चल रही कोई भी कानूनी कार्रवाई स्थायी नागरिकता के लिए उनकी पात्रता को प्रभावित नहीं करेगी।

सरल भाषा में कहें तो इस कानून के अनुसार भारत अब अपने तीन मुस्लिम पड़ौसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैर-मुस्लिम यानि जो मुसलमान नहीं हैं, जिनमें छह समुदायों हिन्दू, बौद्ध, सिख, ईसाई, जैन और पारसी शामिल किया गया है और जो अवैध रूप से शरणार्थी के तौर पर यहां रह रहे थे, उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी। जबकि इन 3 देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को नागरिकता प्रदान नहीं की जाएगी।

और क्या-क्या बदला?

  1. नए नियम के अनुसार ओ.सी.आई कार्ड यानि ‘भारत की नागरिकता के साथ एक विदेशी देश की नागरिकता रखना’ से भारत में यात्रा करने, देश में काम करने और अध्ययन करने की सुविधा भी मिल पाएगी जबकि पहले ओ.सी.आई सिर्फ भारतीय मूल के प्रवासियों को ही दिया जाता था।
  2. यदि कोई ओ.सी.आई कार्ड धारक भारत सरकार के बनाये गए किसी कानून का उल्लंघन करता है तो उसके ओ.सी.आई कार्ड की मान्यता को रद्द किया जा सकेगा।

क्यों हो रहा है विरोध?

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की मुख्य वजह है धर्म के नाम पर अल्पसंख्यको को नागरिकता देना। अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आने वाले मुसलमानों को नागरिकता नहीं दी जाएगी। इसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है जिसके अंदर सभी व्यक्तियों को कानून के सामने समान माना गया है। साथ ही इस कानून में सिर्फ तीन देशों को शामिल किया गया है, जबकि दूसरे देशों से आने वाले अल्पसंख्यकों को इसका फायदा नहीं मिलेगा। असम, मेघालय और त्रिपुरा के अधिसूचित आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले अवैध प्रवासियों को भी इस कानून में शामिल नहीं किया गया है।

सरकार का पक्ष :

इस कानून से तीनो देश से आए अल्पसंख्यको को राहत मिलेगी जिन्हें अपने देश मे धर्म के नाम पर उत्पीरण और भेदभाव के कारण भारत मे शरण लेनी पड़ी।

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