विज्ञान मेले में ढ़ाई किलो की बुलेट प्रूफ जैकेट बनी आकर्षण का केंद्र

विज्ञान मेले में ढ़ाई किलो की बुलेट प्रूफ जैकेट बनी आकर्षण का केंद्र

देश के जवानों की जान बचाने के लिए बारूदी ​सुरंगरोधी जूते हों या विकिरणों से बचाने वाली एल्यूमिनियम के कचरे और लाल मिट्टी से बनी टाइल्स। ये सभी चीजें हमारे जीवन को आसान तो बनाती ही हैं साथ में सुरक्षा भी देती हैं। ऐसे ही नए—नए आविष्कारों का प्रदर्शन ‘राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस’ के दौरान शोधकर्ताओं ने किया। ‘प्राइड ऑफ इंडिया’ नाम की प्रदर्शनी के दौरान देश—विदेश से आए वैज्ञानिकों अपने ​आविष्कारों को प्रस्तुत किया।

इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए वैज्ञानिक, विद्वानों और कॉरपोरेट अधिकारियों के साथ करीब 15 हजार से अधिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। यह भारतीय विज्ञान कांग्रेस का 107वां अधिवेशन है। जो बेंगलूरु में आयोजित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य के लिए :

सीएसआईआर प्रयोगशाला भोपाल में लाल मिट्टी और एल्यूमीनियम के कचरे का प्रयोग कर टाइलें तैयार की गई हैं। जिनसे विकिरणों से होने वाले नुकसान से बचाव हो सकेगा। इन टाइलों का प्रयोग अस्पताल आदि में काफी उपयोगी सिद्ध हो सकेगा। क्योंकि इनका इस्तेमाल वहां स्थित डाइग्नोसिक सेंटरों की दीवारों पर करने से आसपास के क्षेत्र पर नहीं पड़ेगा।

देश के रक्षकों के लिए :

डीआरडीओ की ओर से इस प्रदर्शनी में ‘रुस्तम जी’ जो कि एक मानवरहित विमान है, इसके तीन संस्करण प्रदर्शित किए गए ​​हैं। जहां आतंक प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों की सुरक्षा को देखते हुए बारूदी सुरंगरोधी जूतों का प्रदर्शन किया गया। वहीं बुलेट प्रूफ जैकेट की तुलना में कम वजनी बुलेट प्रूफ जैकेट का भी प्रदर्शन किया गया। जिसका वजन करीब 2.5 किलो ही है।

भोजन के लिए :

लेह के डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टीट्यूड ने पेंगोंग लेक (लद्दाख) और सियाचिन आदि स्थानों में उगाई जा रही हरी सब्जियों का भी प्रदर्शन किया गया। यह कार्य 17 हजार 664 फीट की ऊंचाई पर हो रहा है। जानकारी के अनुसार यहां सेना की चौकियां हैं, जहां जवान प्रशिक्षण लेते हैं। इन्हीं बंकरों में शीशे के कैबिन बना छोटी-छोटी ट्रे में मिट्टी डालकर हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं।

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