ये है ‘मामा-महमूद’ की पॉलिटिक्स का असली ‘मास्टरमाइंड,’ जिसने मध्यप्रदेश में उड़ा दी ‘कांग्रेस की नींद’

ये है ‘मामा-महमूद’ की पॉलिटिक्स का असली ‘मास्टरमाइंड,’ जिसने मध्यप्रदेश में उड़ा दी ‘कांग्रेस की नींद’

बीते एक साल से मध्यप्रदेश की राजनीति में चल रहा घमासान रुकने का नाम नहीं ले रहा ​है। लेकिन इस बार उठा बवंडर कांग्रेस के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। हालांकि राजनीति में इस तरह के परिवर्तन होना कोई नहीं बात नहीं है मगर सालभर की खींचतान के बाद सियासी उलटफेर में इस बार बीजेपी कमलनाथ सरकार को पटखनी देने के पूरे मूड़ में है।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के ​पीछे का ताना बाना बुनने वाले वो शख्स कौन हैं? जिन्होंने कमलनाथ (kamalnath) के शपथ लेने से लेकर आज तक इस चिनगारी को सुलगाए रखा। आइए समझते हैं मध्यप्रदेश की इस नई ‘मामा-महमूद’ पॉलिटिक्स को, जिसने कांग्रेस पार्टी में एक बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं।

कौन हैं जफर महमूद?

जी हां, ये वही शख्स हैं जिन्होंने मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) में होली के अवसर पर रंग भरने का काम किया है। सैयद ​जफर बीजेपी के प्रवक्ता हैं (syed zafar islam)और वह विदेश में एक बैंक में काम करते थे। बताया जाता है कि वह मोदी से इतने प्रभावित हुए​ कि सब कुछ छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। क्वालिफिकेशन की बात करें तो 1951 में बहराइच में जन्मे डॉ. सैयद जफर महमूद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में बीएसी आॅनर्स किया है।

पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी भी की हुई है। ये तीन एनजीओज के फाउंडर भी हैं। वहीं इन्होंने ‘सच्चर कमेटी’ के साथ ‘अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति’ का अध्ययन करने का काम किया है। इनके पिता सैयद महमूद हसन वकील थे।

यहीं से बन गई भूमिका :

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में हुए राजतिलक के बाद से ही ज्योतिरादित्य (Jyotiraditya Scindia) की कांग्रेस से खिन्नता शुरू हो गई थी। और इसकी पुष्टि उस समय हो गई जब पूरी कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जाकर जम्मू कश्मीर से धारा 370 के हटाए जाने का समर्थन सिंधिया ने किया था।


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बस फिर क्या था, ज्योतिरादित्य ने भाजपा को बात करने का मौका दे दिया और अंदर ही अंदर बात शुरू हो गई। जिसकी बागडोर संभाली भाजपा के प्रवक्ता सैयद जफर महमूद ने। सूत्रों की मानें तो पिछले कई महीनों में जफर और सिंधिया के बीच कई बैठकें हुईं। उन्हीं के आधार पर सहमति बनती गई और आखिर में मोदी-शाह (Narendra Modi) के साथ फाइनल बैठक कराई गई।

जिसके बाद ही दोनों के बीच आंतरिक समझौते पर मुहर लगी। मंगलवार को धुलंडी पर सिंधिया ने पार्टी आलाकमान के नाम पार्टी से इस्तीफा देते हुए सोनिया गांधी को पत्र भेजा। वहीं बुधवार को भाजपा मुख्यालय पर दोपहर 2 बजे राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सिंधिया को बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता की शपथ दिलवाई।

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