ये है ‘अमेरिका’ से भी तेज तर्रार ‘रक्षा-सुरक्षा’ वाला देश, जानें इस छोटे से देश के बारे में..

ये है ‘अमेरिका’ से भी तेज तर्रार ‘रक्षा-सुरक्षा’ वाला देश, जानें इस छोटे से देश के बारे में..

इन दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा सभी के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इस यात्रा में ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था को देखकर लोग खासे उत्सुक हैं। लेकिन आपको बता दें कि अमेरिका से भी ज्यादा तेज तर्रार सुरक्षा व्यवस्था वाला देश भी है, जिसका नाम है ‘इजरायल।’ जी हां, सुरक्षा की दृष्टि से बात करें तो इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था का तोड़ विश्व के किसी भी देश के पास नहीं है। यहां तक कि अमेरिका भी इजरायल की सुरक्षा ऐजेंसी का सहयोग लेता रहा है।

देश भले ही छोटा है मगर स्वाभिमानी होने के साथ ही सबसे खतरनाक एवं यहूदी धर्म को मानने वाला एकमात्र ऐसा देश है जिसकी तकनीकि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि के मामलों में दुनियाभर में तूती बोलती है। आज हम आपको इस देश की सुरक्षा व्यवस्था में काम करने वाली सबसे खतरनाक खुफिया ऐजेंसी के बारे में बताएंगे, जो कि कई मायनों में अमेरिका से बेहतर है।

ज्यादातर मामलों में हमने अमेरिका की खुफिया ऐजेंसी ‘एफबीआई’ का नाम ही सुना है, लेकिन इजरायल की खुफिया ऐजेंसी ‘मोसाद’ वह नाम है जिससे अमेरिका भी खौफ खाता है। इतना ही नहीं अमेरिका कई मामलों में मोसाद की मदद ले चुका है। आपको बता दें कि दुनिया में सबसे पहले सर्जिकल स्ट्राइक करने वाला देश भी इजरायल ही है। यही कारण है कि इलरायल के दुश्मन देश भी उससे घबराते हैं।

ऐसी है इजरायल की ‘मोसाद’ :

जर्मनी में 1972 में हुए आतंकी हमले में मुस्लिम आतंकवादियों ने 12 इजरायली खिलाड़ियों को मार दिया गया था, जिसको लेकर इजरायल ने मारे गए खिलाड़ियों के ​परिवारों से सिर्फ एक ही बात कही थी कि हम बदला अवश्य लेंगे। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री ने मोसाद को कहा कि आतंकी दुनिया के किसी भी कोने में हों, तुरंत मार दो और ऐसा ही हुआ।

इसलिए बनी मोसाद :

इजरायल ने इसकी स्थापना खुफिया संग्रह, गुप्त आपरेशन, और आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए की थी। मोसाद का जन्म 13 दिसंबर 1949 में एक केन्द्रीय संस्थान के रूप में हुआ। उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियन थे। मार्च 1951 में इसे पुनर्गठित किया गया और इसे प्रधानमंत्री कार्यालय का एक हिस्सा बनाया गया।

मोसाद का जन्म आतंकवाद से लड़ने के लिए किया गया था। इस संगठन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। इसकी अधिकतर जानकारियों को गुप्त कर दिया गया है। इसमें उन्हीं लोगों का चयन होता है जो कि पहले इजरायल की ‘आइडीएफ’ में काम कर चुके हों।

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