राम मंदिर नहीं बल्कि ऐसा लग रहा है मानो संघ का कार्यालय बन रहा हो : शंकराचार्य

राम मंदिर नहीं बल्कि ऐसा लग रहा है मानो संघ का कार्यालय बन रहा हो : शंकराचार्य

— मंदिर शिलान्यास की तिथि को बताया अशुभ..

राम मंदिर के साथ भारत के करोड़ों नागरिकों की आस्था जुड़ी हुई है, जो सनातन धर्म को मानने वाले हैं। वर्षों के संघर्ष के उपरांत राम मंदिर बनने की सभी अटकलें दूर हो चुकी हैं और मंदिर निर्माण की तारीख भी आ गई है, लेकिन ऐसे में राम मंदिर के निर्माण की​ तिथि को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जिनमें सबसे बड़ा सवाल जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने उठाया है। शंकराचार्य ने इस तिथि को पूरी तरह से अशुभ बताया है। शंकराचार्य की ओर से दिए गए इस बयान को लेकर मंदिर निर्माण की तिथि अब देशभर में एक चर्चा का विषय बन गई है।

शंकराचार्य ने कहा है कि जिस प्रकार से मनमाने रवैए के ​तहत मंदिर निर्माण की तिथि को चुना है, उससे यह आशंका हो रही है कि वहां मंदिर नहीं बल्कि संघ का कार्यालय बनाया जा रहा हो। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के शिलान्यास के लिए 5 अगस्त 2020 के दिन को चुना है। इस दिन दक्षिणायन भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है, जिसमें किसी प्रकार के भवन आदि का निर्माण अशुभ माना जाता है। वहीं घर और मंदिर का निर्माण पूर्णत: निषिद्ध है।

वहीं कुछ लोगों का ये भी कहना है कि सनातन धर्म में कोई भी बड़ा शुभ कार्य हो अथवा हवन ​आदि का कार्यक्रम हो उसमें जोड़े के साथ पूजा अर्चना करना अतिमंगल बताया गया है। याद होगा जब भगवान श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ किया था तो माता सीता के उपस्थित न होने से ऋषियों ने यज्ञ के संपूर्ण न होने की बात कही थी। तब भगवान श्रीराम ने सोने की सीता प्रतिमा बनवाकर उसके साथ पूर्णाहूति दी थी। ऐसे लोग कह रहे हैं कि अब भगवान श्रीराम के मंदिर की आधा​रशिला के अवसर पर होने वाली पूजा अर्चना भी पूरे जोड़े के साथ की जानी चाहिए।

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