संसद में बोले मोदी: कृषि परिवर्तन से विकास होता है या नहीं, एक बार देखें तो सही! और कहा..

संसद में बोले मोदी: कृषि परिवर्तन से विकास होता है या नहीं, एक बार देखें तो सही! और कहा..

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा के जवाब में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन के समक्ष अपनी बात रखी। अपने इस संबोधन में पीएम मोदी का पूरा फोकस किसानों पर रहा। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटे किसान अपनी जमीन में गुजारा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं देश में अब ऐसे किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने एक आंकड़ा देते हुए कहा कि भारत में छोटे किसानों की संख्या 12 करोड़ तक पहुंच चुकी है। ऐसे में हमें इन छोटे किसानों के बारे में भी सोचना होगा।

किसानों से बातचीत के रास्ते खुले :

पीएम मोदी ने कहा कि कर्जमाफी से किसानों को कितना लाभ होता है ये सभी जानते हैं। लोग ये भी जानते हैं कि कर्जमाफी किसानों की भलाई के लिए है या वोट बैंक के लिए है। पीएम ने आगे कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए हमें देश को आगे ले जाना होगा। इसमें पक्ष-विपक्ष सभी को साथ देना होगा। किसानों के साथ बातचीत के सभी रास्ते खुले हुए हैं। आज देश में चार लाख करोड़ का पेमेंट डिजिटली हो रहा है। इसके अलावा टेक्नोलॉजी के मामले में मोबाइल फोन निर्माता के रूप में दुनिया का दूसरा देश बना है। वहीं सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने जगह बनाई है। अंतरिक्ष हो, एयर स्ट्राइक हो या सर्जिकल स्ट्राइक हो सबने भारत की प्रतिभा को देखा है।

एमएसपी है, एसएसपी था और एमएसपी रहेगा

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर कानून में अच्छे सुझावों के बाद अक्सर बदलाव होते हैं। इसलिए अच्छा करने के लिए अच्छे सुझावों के साथ, अच्छे सुधारों की तैयारी के साथ हमें आगे बढ़ना होगा। हमें एक बार देखना चाहिए कि कृषि परिवर्तन से बदलाव होता है कि नहीं। कोई कमी हो तो उसे ठीक करेंगे, कोई ढिलाई होगी तो उसे कसेंगे। मैं विश्वास दिलाता हूं कि मंडियां और अधिक आधुनिक होंगी साथ ही प्रतिस्पर्धी बनेंगी। एमएसपी है, एसएसपी था और एमएसपी रहेगा। जिन 80 करोड़ लोगों को सस्ते में राशन दिया जाता है वो भी कंटिन्यू रहेगा। हम इस सदन की पवित्रता समझें।

किसानी का बोझ कम करना होगा :

किसान की आय बढ़ाने के जो दूसरे उपाय हैं हमें उन पर भी बल देने की जरूरत है। आबादी बढ़ रही है, जमीन के टुकड़े छोटे होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमें कुछ न कुछ ऐसा करना होगा, जिससे किसानी पर बोझ कम हो और किसानों को रोजी रोटी के लिए केवल कृषि पर ही निर्भर न रहना पड़े। इसीलिए सभी से प्रार्थना है कि किसानों के उज्ज्वल भविष्य पर राजनीति करने से हम सभी को बचना चाहिए।

मधुमक्खी पालन के माध्यम से शहद उत्पादन कर अपनी कमाई को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए किसान को ज्यादा जमीन की जरूरत भी नहीं होगी, खेत के एक छोटे से कोने में किसान यह काम कर सकता है। इसके साथ ही किसान सोलर पंप के माध्यम से खेत की सिंचाई के साथ-साथ बिजली उत्पादन भी कर सकते हैं।

पंजाब को लेकर कहा –

भारत की ताकत ऐसी समस्याओं के समाधान करने और नए रास्ते खोजने की रही है, लेकिन कुछ लोग हैं जो भारत को अस्थिर करना चाहते हैं। हमें ऐसे लोगों को जानना होगा। हमें ये भूलना नहीं चाहिए कि बंटवारे के बाद पंजाब में क्या हुआ! उस वक्त सबसे ज्यादा पंजाब को भुगतना पड़ा, जब 84 के दंगे हुए तो सबसे ज्यादा आंसू पंजाब के बहे। कुछ लोग सिक्ख भाइयों के मन में गलत बातें डालकर उन्हें गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। पूरा देश सिक्ख भाइयों पर गर्व करता है। मुझे भी पंजाब की रोटी खाने का अवसर मिला है।

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