अब आईफोन का डाटा भी हुआ अनसेफ, एप्पल ने अपने बचाव में कहा कि..

अब आईफोन का डाटा भी हुआ अनसेफ, एप्पल ने अपने बचाव में कहा कि..

– पहले भी ​​हैकर्स कर चुके हैं हैक

डाटा चोरी को लेकर पहले से ही दुनिया के तमाम देशों में होड़ मची हुई है। लेकिन इस बार कुछ ऐसा हुआ कि प्राइवेसी को लेकर लोग सकते में आ गए हैं। क्योंकि इस बार अमेरिकी जांच ऐजेंसी ने ही दुनिया की सबसे सेफ मानी जाने वाली मोबाइल कंपनी एप्पल के मोबाइल से डाटा को हैक कर लिया। आपको याद होगा इससे पहले भी एफबीआई 2016 में हैकर्स की मदद से आईफोन को अनलॉ​क करवा चुकी है। लेकिन इस बार उन्होंने खुद ही ये तकनीकि विकसित करने में कामयाबी हासिल कर ली है।

इसलिए किया हैक :

दिसंबर माह में अमेरिका में फ्लोरिड़ा के नौसेना एयरबेस पर सउदी वायुसेना में कार्यरत 21 वर्षीय कैप्टन मोहम्मद अलशरामनी ने धुआंधार गोलीबारी कर 3 सैनिकों को मार गिराया था। वहीं इस हमले में आठ से दस लोग घायल हुए थे। इसके अलकायदा से संबंध होना बताया गया है। इसके पास से एक आईफोन i phone बरामद किया गया। इस फोन के माध्यम से एफबीआई FBI कुछ और साक्ष्य जुटाना चा​हती थी। इस फोन को अनलॉक करने के लिए ऐजेंसी ने एप्पल से कई दफा संपर्क किया। लेकिन कंपनी ने अपनी प्राइवेसी का हवाला देते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।

इसके उपरांत एफबीआई ने बिना एप्पल Apple की मदद से इसे अनलॉक करने में सफलता हासिल की। इसके जरिए कई जानकारियां सुरक्षा ऐजेंसी के हाथ लगने की बात सामने आई है।

एप्पल ने बचाव में कहा कि..

इस घटना के बाद एप्पल ने अपना बचाव करते हुए कहा कि यह कारनामा किसी के घर में पिछले दरवाजे से चोरी छिपे प्रवेश करने जैसा है। कंपनी ने इस तरह की कार्य प्रणाली की निंदा करते हुए कहा ​कि यह तरीका इस तरह के मामले हल करने के लिए उचित नहीं है।

ऐजेंसी ने खर्चे 10 लाख डॉलर :

ऐजेंसी का कहना है कि उसने इस तरह की तकनीकि विकसित करने के लिए करीब 10 लाख डॉलर का खर्चा किया है। इससे पहले 2016 में भी एप्पल कंपनी ने एक मामले में जानकारी साझा करने से मना कर दिया था। तब ऐजेंसी को पेशेवर हैकर्स की मदद लेनी पड़ी थी। ऐसा माना जाता है कि उसके बाद से ही ऐजेंसी ने इस पर काम करना शुरू कर दिया था।

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