प्रदेश के खिलाड़ियों के साथ हो रहा अत्याचार, अब तो जागो सरकार

प्रदेश के खिलाड़ियों के साथ हो रहा अत्याचार, अब तो जागो सरकार

‘अंधा बांटे रेबड़ी फिर-फिर अपनों को देय’ यह कहावत बीकानेर स्थित देश के प्रतिष्ठित सादुल स्पोर्ट्स स्कूल के वर्तमान हालात पर सटीक बैठती है। राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग की मिलीभगत और अंधेरगर्दी के चलते पिछले लंबे समय से देश का यह प्रख्यात स्कूल पिछड़ता जा रहा है। जिसका दुष्परिणाम ये है कि अब इस स्कूल से कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं निकलता जो प्रदेश और देश को गौरवान्वित करे।

सरकार भले ही खेलों के नाम पर करोड़ों के आयोजन करवाकर वाहवाही लूट ले, मगर जब त​क खिलाड़ियों के बुनियादी सिस्टम में सुधार नहीं होगा। तब तक कुछ नहीं हो सकता। बता दें जब इस संस्थान ने देश और प्रदेश को नामी खिलाड़ी दिए, लेकिन पिछले लंबे समय से सरकार की अनदेखी कहें या मिलीभगत ने इस संस्थान का बुरा हाल कर रखा है। इसे प्रदेश के खिलाड़ियों के साथ एक षड्यंत्र अथवा अन्याय ही कहा जाएगा।

6 करोड़ का बजट किसकी जेब में :

राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा बीकानेर में संचालित सादुल स्पोर्ट्स स्कूल राजस्थान का एकमात्र आवासीय खेल विद्यालय है। जिसकी स्थापना वर्ष 1982 में हुई थी। इस संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्य में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करना था। जिसका सालाना बजट करीब 6 करोड़ रुपए है। यदि वास्तविकता पर गौर किया जाए तो प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग इस संस्थान की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बिल्कुल गंभीर नहीं है।

इस ​तरह हो रहा खिलवाड़ :

सादुल स्पोर्टस स्कूल में सरकार द्वारा 12 खेल संचालित हो रहे हैं। जिसमें प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों की योग्यता सरकार द्वारा स्पष्ट रूप से विभागीय आदेश में निकाली है कि वह डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स एंड कोचिंग के साथ प्रथम श्रेणी या द्वितीय श्रेणी ही यहां पर प्रशिक्षक लगने योग्य है। लेकिन वास्तविकता ये है कि यहां पर 12 खेलों में से 6 खेलों एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस, जिमनास्टिक, हैंडबॉल और कबड्डी पर ही सरकार द्वारा जारी योग्यताधारी प्रशिक्षक लगे हुए हैं।

बाकी 6 खेलों क्रिकेट, वॉलीबॉल, कुश्ती, हॉकी, खो-खो और फुटबॉल में जिनको लगाया हुआ है उनके पास सरकार द्वारा निर्धारित कोई योग्यता ही नहीं है। यह सभी तृतीय श्रेणी शारीरिक शिक्षक हैं। हैरानी की बात तो ये है कि इनमें से किसी के भी मूल खेल ये रहे ही नहीं है। जबकि सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता रखने वाले कई शिक्षक इसी शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं।

खिलाड़ियों के भविष्य से खेलना बंद करें :

सच्चाई ये है कि यदि विगत 10 वर्षों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आंकडे देखें तो मायूसी होगी। जिस संस्थान ने देश प्रदेश को खेल जगत के बड़े खिलाड़ी दिए। वहीं संस्थान अब अराजकता और अव्यवस्था का शिकार हो चुका है। जिससे इसके गौरवमयी इतिहास पर प्रश्न वाचक चिन्ह लग गया है।
सरकार का उद्देश्य सिर्फ अपने चहेतों को अयोग्य होते हुए भी यहां पदस्थापित रखना है, उनको रेवड़ियां बांटना है। इसकी जिम्मेदार राजस्थान सरकार और उसका शिक्षा विभाग है। इसके संपूर्ण दस्तावेज मेरे पास मौजूद हैं।

— दानवीर सिंह भाटी, पूर्व कप्तान, राजस्थान बास्केटबाल टीम।

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