हंता वायरस : ‘कोरोना’ के बाद ‘हंता’ ने बढ़ाई ‘चाईना’ की चिंता, 1 की मौत

हंता वायरस : ‘कोरोना’ के बाद ‘हंता’ ने बढ़ाई ‘चाईना’ की चिंता, 1 की मौत

चीन की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी तक कोरोना वायरस (coronavirus) की मार से निकला भी नहीं था कि एक और वायरस की चपेट में आने की खबर सामने आ गई। शंका तब और बढ़ गई जब इस नए वायरस से पीड़ित व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। जी हां, हुनान की तरह ही चीन के युन्नान प्रांत में अब एक नए वायरस हंता (Hanta virus) ने दस्तक दे दी है। चीन अब इस हंता के इलाज की खोज में लग गया है। हंता का नाम सुनते ही चीन के साथ-साथ दुनिया के बाकी देश भी अलर्ट मोड़ पर आ गए हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग अब कोरोना को छोड़ हंता की चिंता में लग गए हैं।

चीन अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार एक व्यक्ति काम करने के लिए बस से शाडोंग प्रांत आ रहा था। जब उसकी तबीयत खराब हुई तो जांच में उसे हंता पॉजिटिव पाया गया। ऐसे में उसके साथ बस में यात्रा करने वाले सभी 32 यात्रियों की जांच की गई है। हालांकि उपचार के दौरान उस संक्रमित व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इस वायरस की उत्पत्ति का केंद्र दक्षिणी पश्चिमी अमेरिका को (America) माना जाता है। यह वायरस सबसे पहले 1993 में सामने आया था।

ऐसे फैलता है हंता :

एक्सपर्ट्स की मानें तो हंता वायरस चूहों के संपर्क में आने से फैलता है। हालांकि यह कोरोना की तरह मनुष्य से मनुष्य में नहीं फैलता है। सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (Centre for Disease Control and Prevention) के अनुसार कोई भी स्वस्थ व्यक्ति इस वायरस के संपर्क में आ सकता है। इसकी शुरुआत घर अथवा बाहर मौजूद चूहे कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति चूहों (mouses) के मलमूत्र या किसी अन्य प्रकार से उनके संपर्क में आते हैं तो वह इसका आसानी से शिकार बन जाते हैं।

हंता वायरस भी कोरोना की तरह आंख, नाक एवं मुंह के माध्यम से शरीर के अंदर प्रवेश करता है। लेकिन गनीमत है कि यह हवा से हवा में नहीं फैलता है।

कैसे पहचानें :

हंता वायरस के संक्रमित व्यक्ति की पहचान कोरोना संक्रमित की तरह ही की जाती है। क्योंकि ज्यादातर लक्षण (symptoms) दोनों में एक समान ही हैं। हंता वायरस की चपेट में आने पर व्यक्ति को वही तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सिर में दर्द आदि की समस्या आने लग जाती है। साथ ही उल्टी, पेट दर्द और डायरिया की शिकायत भी रहती है। यदि इलाज में देरी की गई तो व्यक्ति के फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो जाता है।

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