मां-बाप-बच्चे रोज बुलाते हैं, इनका एक ही जबाव- देश को हमारी जरूरत है

मां-बाप-बच्चे रोज बुलाते हैं, इनका एक ही जबाव- देश को हमारी जरूरत है

पढ़िए प्रदेश के 4 कोरोना वॉरियर्स की कहानी..

प्रदेश में कोरोना वायरस coronavirus की स्थिति खतरनाक होती जा रही है। ऐसे में अपने घर से दूर परिवार को छोड़ प्रदेश के कई अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सेज एवं तमाम पैरामेडिकल एवं सफाईकर्मी स्टाफ मुस्तैदी के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह हॉस्पिटल sms hospital में ऐसे ही चार संविदा नर्सेजकर्मी हैं। जो पिछले ​कई दिनों से कोरोना मरीजों के साथ रहकर अपना फर्ज निभा रहे हैं। ये चारों नर्सेजकर्मी अलग-अलग जिलों के हैं। जो कई महीने से घर नहीं गए। और इसी बीच कोरोना महामारी ने पैर पसार दिए। आओ जानें, इनकी भी कहानी..

अभी देश को जरूरत ​है पापा :

करौली जिले karauli की सपोटरा तहसील में एक गांव है जीरौता। वहीं के रहने वाले हैं सोम सिंह मीणा। सोमसिंह पिछले 6 साल से एसएमएस अस्पताल में नर्स ग्रेड द्वितीय के पद पर कार्यरत हैं। कहते हैं कि जब से कोरोना महामारी के बारे में घर पता चला। तब से परिवार के लोग थोड़ी टेंशन में हैं। एक दिन पिताजी फोन पर बोले बेटा सब लोग घर आ गए, तुम क्यों नहीं आए। इस पर उन्होंने कहा कि पापा कोरोना वायरस से लड़ने के लिए उनका अस्पताल में काम करना बहुत जरूरी है। अभी मेरी देश को जरूरत है। कोरोना को हराकर जल्दी ही घर आउंगा।

बेटी शिवन्या से फोन पर ही मुलाकात :

सीकर जिले sikar में विजयपुरा के रहने वाले मनोज चाहर कई सालों से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में नर्स ग्रेड द्वितीय के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कोरोना संकट के इस दौर में वह भी अपने परिवार से दूर हैं। उनकी 3 साल की बेटी शिवन्या से फोन पर रोज बात होती है। वह रोज एक ही सवाल करती है कि सबके पापा उनके बिट्टू के पास हैं। लेकिन वह जाते ही नहीं हैं। इस पर उनकी आंखें नम जरूर होती हैं, लेकिन देश की सेवा का जज्बा कम नहीं होता। वह बेटी को यही कहते हैं कि अभी कोरोना से उनकी लड़ाई चल रही है। उसे हराकर जल्दी ही आएंगे।

14 महीने की बेटी से दूर :

हनुमानगढ़ जिले hanumangarh की नोहर तहसील के भुकरका निवासी जसवंत सिंह भी कोविड19 के इस दौर में अपना धर्म निभाने से पीछे नहीं हटे। उनके पास मौका था घर जाने का, लेकिन मन नहीं माना। और यहीं लग गए मरीजों की सेवा में। लेकिन घर वालों को जब से डॉक्टर्स के संक्रमण होने की बात पता लगी है तब से उन्हें ज्यादा चिंता होने लगी है। बता दें जसवंत की 14 महीने की एक बेटी है खुशजोत। हालांकि वह अभी समझ नहीं पाती लेकिन जब भी फोन पर देखती है तो कई बार रो देती है। उसे कैसे बताएं कि जल्द कोरोना हारेगा और वह उससे पास आ जाएंगे। ये भी एसएमएस में नर्स ग्रेड द्वितीय के पद पर कार्यरत हैं।

देश जिताना है, प्रदेश बचाना है :

ऐसी ही कहानी सीकर sikar जिले के लक्ष्मणगढ़ निवासी नरेंद्र सिंह की है। उन्होंने भी देश में आए इस संकट की घड़ी में एसएमएस अस्पताल में ही अपना योगदान देने की ठानी। दुनियाभर में कोरोना के प्रकोप को देखने के बावजूद भी उन्होंने घर नहीं जाने का निर्णय लिया। 3 साल का बेटा दर्शिश उनसे रोज घर आने की जिद करता है। वह कई बार जबाव नहीं दे पाते, तो उनकी पत्नी सुशीला बेटे को समझा लेती हैं। अब तो बस एक ही धुन है कि कोरोना को हराना है, देश को जिताना है और प्रदेश को बचाना है।

सरकार से नि​युक्ति की अपील भी :

चारों नर्सिंग कर्मचारी नर्स ग्रेड द्वितीय पद पर एसएमएस अस्पताल में कार्यरत हैं। वर्तमान में कोविड-19 के चलते पिछले कई दिनों से कोरोना आईसीयू में कोरोना पॉजिटिव मरीजों को नर्सिंग सेवाएं दे रहे हैं। सभी नर्सिंग सीधी भर्ती 2018 में चयनित हैं। अपना फर्ज अदा करते हुए राज्य सरकार से अपील भी करते हैं कि सरकार govt. of rajasthan चयनित नर्सेज को पदस्थापन देकर नियुक्ति दे। जिससे संकट की घड़ी में कड़ी मेहनत और लगन के साथ कार्य कर रहे नर्सेज और भयमुक्त होकर कार्य कर सकेंगे। सरकार को ऐसे वॉरियर्स corona warriors की जायज मांग पर जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए।

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