भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन, ऐसा रहा मास्टर से महामहिम बनने का सफर

भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन, ऐसा रहा मास्टर से महामहिम बनने का सफर

भारतीय राजनीति में विरोधी भी उनका नाम सम्मान से लिया करते थे, ऐसे राजनीति के पुरोधा के साथ आज एक युग का भी अंत हो गया। भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का सोमवार को इलाज के दौरान 84 साल की उम्र में निधन हो गया। इस बात की पुष्टि उनके बेटे अभिजित मुखर्जी ने ट्वीट के माध्यम से दी। बता दें कि प्रणब मुखर्जी Pranab Mukherjee की हालत कई दिनों से ज्यादा खराब चल रही थी। अभिजित ने कहा कि देश के करोड़ों लोगों की दुआ-प्रार्थना एवं हॉस्पीटल के डॉक्टरों के सर्वोत्तम प्रयास के बावजूद हम उन्हें नहीं बचा सके।

मास्टर से महामहिम का सफर :

प्रणब मुखर्जी का एक टीचर और क्लर्क के बाद राष्ट्रपति पद तक पहुंचना इतना आसान नहीं रहा। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक कॅरियर में कई उतार चढ़ाव देखे। मगर इंदिरा गांधी के समय में उन्हें कैबिनेट का दूसरा दर्जा प्राप्त था, जो कि एक बड़ी उप​लब्धि से कम नहीं था। इंदिरा की हत्या हुई तो उसके बाद माना जा रहा था कि अब उन्हें प्रधानमंत्री बनने से कोई नहीं रोक सकता है, लेकिन पार्टी ने राजीव गांधी को चुना।

उसके बाद दूसरा मौका 1991 में आया जब राजीव गांधी की हत्या हुई। इस समय प्रणब के मुकाबले का कोई नेता पार्टी में दिखाई नहीं दे रहा था तो लगा कि इस बार उन्हें प्रधानमंत्री का पद जरूर मिल जाएगा। मगर इस बार नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाया गया। इसके बाद तीसरा मौका 2004 में आया जब ऐसा नहीं हुआ। कमान सोनिया के हाथों में थी और उन्होंने मनमोहन सिंह Manmohan Singh को इस पद के लिए चुन लिया।

जब मोदी ने की तारीफ :

बता दें कि प्रणब मुखर्जी एक पत्रकार भी थे। कई डिग्रियां उनके पास थीं। बाद में जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा तो वहां भी उन्हें एक अलग पहचान मिली। बताते हैं कि उनकी राजनीतिक समझ को देखकर ही इंदिरा भी उन्हें मानती थी। 2008 में उन्हें पद्म विभूषण और 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। जब उन्हें भारत रत्न के लिए चुना गया तो प्रधानमंत्री मोदी Modi ने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा था कि यह उनके द्वारा किए कार्यों के लिए है।

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