राजस्थान के 12वीं पास लड़के ने बनाया देश का पहला ड्राइवरलैस ट्रैक्टर, कैसे करता है काम देखिए

राजस्थान के 12वीं पास लड़के ने बनाया देश का पहला ड्राइवरलैस ट्रैक्टर, कैसे करता है काम देखिए

Rajasthan. अभी तक हमने ड्राइवरलैस कारों Driverless Car के बारे में ही सुना था, मगर 12वीं पास एक छात्र ने किसानों के लिए एक ट्रैक्टर बनाया है जो कि बगैर ड्राइवर के सारे काम करता है। इस छात्र का नाम योगेश नागर है और ये राजस्थान के एक छोटे से जिले बारां Baran का रहने वाला है। खेत में ट्रैक्टर चलाते वक्त अचानक उसके दिमाग में यह आइडिया आया और उसे हकीकत बनाने की ठान ली। 19 साल की उम्र में उसने यह कारनामा कर दिखाया है। यह देश का पहला Driverless Tractor ड्राइवरलैस ट्रैक्टर है। अब योगेश देश के जवानों के लिए एक ऐसा ड्राइवरलैस टैंक Tank बनाना चाहता है, जिसे नष्ट कर पाना दुश्मन के लिए नामुमकिन हो।

ऐसे हुई शुरुआत :

दरअसल हुआ यूं कि योगेश 12वीं की परीक्षा पास कर बीएससी Bsc प्रथम वर्ष की पढ़ाई के लिए कोटा चले गए। मगर कुछ महीने बाद ही घर से कॉल आया कि उनके पिता के पैर में प्रॉब्लम है और उन्हें ट्रैक्टर चलाने में दिक्कत आ रही है। गांव आने के बाद योगेश ने करीब 2 महीने तक खूब ट्रैक्टर चलाया। इसी दौरान उसके दिमाग में इस तरह का आइडिया आया। योगेश ने जब ये बात अपने पिता के साथ शेयर की तो उन्हें यकीन नहीं हुआ और इसके लिए उन्होंने योगेश को पहले 2000 रुपए दिए ताकि वह उसकी कोई एक झलक दिखा सके।

इस तरह से करता है काम :

साधारण तौर पर बात करें तो योगेश ने इस ट्रैक्टर को अपने दिमाग की उपज बताया है। चूंकि वह एक साइंस का स्टूडेंट है और उसे इंजीनियरिंग की कोई टैक्निकल नॉलेज नहीं थी। योगेश ने ट्रैक्टर में एक ट्रांसमीटर लगाया है जो कि ट्रैक्टर और रिमोट कंट्रोल के बीच एक कनेक्टर का काम करता है। वह जो भी आदेश रिमोट कंट्रोल से देता है, वह ट्रैक्टर तक पहुंचाने का काम करता है। इसके बाद ट्रैक्टर के अंदर मौजूद क्लच, गीयर, ब्रेक और स्टीयरिंग उसी के अनुसार काम करने लगते हैं। इस रिमोट की रेंज करीब डेढ किलोमीटर तक की है। यानी डेढ किलोमीटर दूर से भी इस ट्रैक्टर को कंट्रोल किया जा सकता है।

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क्या होगा फायदा ?

इस आविष्कार से ट्रैक्टर चालक को ट्रैक्टर की सीट पर बैठने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। खेत की एक मेंढ पर बैठे-बैठे वह अपने खेत के सारे काम कर सकता है। खासकर खेत की जुताई करते समय ड्राइवर को बड़ी तकलीफ होती है। चूंकि ट्रैक्टर के अंदर शॉकर का प्रयोग नहीं होता। इसलिए ड्राइव करते समय धमक या धचकी ज्यादा लगती है। इस कारण से चालक को पेट से संबंधित प्रॉब्लम बनी रहती हैं। अब इससे कुछ हद तक छुटकारा मिल सकेगा।

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