आओ सुनाएं ‘प्याज’ की एक कहानी..! जरूर पढ़ें

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— आखिर महाराष्ट्र सीएम से ज्यादा प्याज की चर्चा क्यों?

गरीब का खाना कही जाने वाली प्याज इन दिनों राजनीति की बातों से ज्यादा चर्चे में है। हालांकि देखा जाए तो यही प्याज अमीरों की थाली में कम नजर आता है। यहां ​हम इस पर बात नहीं करेंगे। आज हम बात कर रहे हैं उस प्याज की, जो कल तक किस्सा-ए-आम थी, आज ‘खास’ हो गई। बाजार में 20 से 30 रुपए प्रतिकिलो बिकने वाला प्याज इन दिनों 80 से 100 रुपए ​प्रतिकिलो के हिसाब से बिक रहा है।

भूलिएगा मत जनाब, बढ़ते प्याज के दामों के कारण लोगों को ही नहीं, समय-समय पर सरकारों को भी आंसू बहाने पड़े हैं। साल 1980, 1998, 2010, 2013 और 2015 में हम देख भी चुके हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल सकता है। इस बार भी प्याज के भावों में उठापटक के कारण कई बार जनता को परेशान होना पड़ा है। जिसे मुद्दा बना कर राजनीतिक पार्टियां अपनी रोटियां सेकती रही हैं। जनता के आक्रोश से बचने के लिए वर्तमान सरकारों की ओर से आम जनता के लिए सस्ते प्याज के सेंटर तक खोलने पड़ गए थे।

मौसम की मार भी पड़ती है भारी..

मुनाफाखोरी की वजह से प्याज की कम आवक के साथ ही कम उत्पादन भी एक बड़ा कारण है। जानकारों की मानें तो जून, जुलाई से महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में सूखे का दौर रहा। जिस कारण या तो किसान प्याज की बुआई नहीं कर सके और जिन्होंने बुआई की भी तो पानी की कमी के चलते उनकी फसलें खराब हो गई।

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